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स्वास्थ्य 6 जुलाई 2026 2 मिनट का पठन 6 जुलाई 2026

चिरायु दल ने बदली माड़कम हुंगा की जिंदगी सफल उपचार

अपडेट किया गया: 6 जुलाई 2026

चिरायु दल ने बदली माड़कम हुंगा की जिंदगी सफल उपचार

बीजापुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित चिरायु दल दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड़) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा को जन्मजात क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट (कटे होंठ और तालु) की समस्या से सफलतापूर्वक मुक्ति दिलाई गई।

माड़कम हुंगा जन्म से ही इस गंभीर जन्मजात विकृति से पीड़ित था। इसके कारण उसे भोजन करने, स्पष्ट रूप से बोलने और सामान्य सामाजिक जीवन जीने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका उच्चस्तरीय उपचार संभव नहीं हो पा रहा था।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु दल ने विद्यालय में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम की पहचान की। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम ने आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर उसे उच्चस्तरीय उपचार के लिए रेफर किया।

बीएमओ एवं बीपीएम उसूर के मार्गदर्शन में 25 जून को माड़कम को रायपुर स्थित मेडिसिन अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट की सफल प्लास्टिक सर्जरी की।

सर्जरी के बाद चिकित्सकों की निगरानी में माड़कम के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ और 30 जून को उसे पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

चिरायु दल की इस पहल ने न केवल एक बच्चे को नया जीवन दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि समय पर पहचान और उचित उपचार से गंभीर जन्मजात विकृतियों का सफल इलाज संभव है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम दूरस्थ क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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बस्तर संवाददाता

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