राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय समारोहों की श्रृंखला में बुधवार को जगदलपुर में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के अंतर्गत आमचो माटी सांस्कृतिक संस्था द्वारा हल्बी भाषा में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया जाएगा।
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत सरकार 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक देशभर में वर्षभर विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।
जगदलपुर में आयोजित होने वाली इस विशेष प्रस्तुति का निर्देशन वेदांत झा ने किया है। कार्यक्रम बुधवार शाम 6 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर के समीप आयोजित होगा, जहां आम नागरिक भी इस नाट्य प्रस्तुति का आनंद ले सकेंगे।
नाटक में बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, 1910 के भूमकाल विद्रोह और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरक गाथा को मंच पर जीवंत किया जाएगा। हल्बी भाषा में होने वाली यह प्रस्तुति स्थानीय संस्कृति और इतिहास को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण 'विकसित भारत फोर्थ कॉलम' के आधिकारिक डिजिटल चैनल पर भी किया जाएगा, जिससे देशभर के दर्शक इस सांस्कृतिक आयोजन से जुड़ सकेंगे।
आयोजकों के अनुसार, इस नाट्य प्रस्तुति का उद्देश्य राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के ऐतिहासिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय गौरव को भी नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना है।