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संस्कृति 18 अप्रैल 2026 1 मिनट का पठन 18 अप्रैल 2026

बस्तर की धातु शिल्प कला को मिला राष्ट्रीय पहचान

अपडेट किया गया: 8 मई 2026

बस्तर की प्राचीन ‘ढोकरा’ धातु शिल्प कला को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जिससे स्थानीय शिल्पकारों में नया उत्साह है।

बस्तर की धातु शिल्प कला को मिला राष्ट्रीय पहचान

बस्तर के घने जंगलों के बीच बसे गाँवों में सदियों से चली आ रही ढोकरा कला आज अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रही है। मोम के साँचे और पीतल के मिश्रण से बनी यह कला बेजोड़ है।

शिल्पकार पीढ़ियों से अपने पूर्वजों की तकनीकों को सहेजते आ रहे हैं। हर मूर्ति, हर आभूषण में बस्तर की लोक कथाएँ, देवता और दैनिक जीवन की झलक मिलती है।

राज्य सरकार और निजी संस्थाओं की मदद से शिल्पकारों को बेहतर बाज़ार और प्रशिक्षण मिल रहा है, जिससे यह विरासत न केवल जीवित रहेगी बल्कि और समृद्ध होगी।

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बस्तर संवाददाता

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