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संस्कृति 27 मई 2026 2 मिनट का पठन 27 मई 2026

ज्ञानभारतम् मिशन से दुनिया के सामने आएगा दंतेवाड़ा का इतिहास

अपडेट किया गया: 27 मई 2026

दंतेवाड़ा में मिलीं सदियों पुरानी धरोहरें, ज्ञानभारतम् मिशन ने खोले बस्तर के गौरवशाली इतिहास के द्वार

ज्ञानभारतम् मिशन से दुनिया के सामने आएगा दंतेवाड़ा का इतिहास

Gyan Bharatam Mission:-छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और रहस्यमयी विरासत के लिए जाना जाता है। अब दंतेवाड़ा जिले में हुई एक ऐतिहासिक खोज ने इस क्षेत्र को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक अध्ययन के केंद्र में ला खड़ा किया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम् मिशन” के तहत दंतेवाड़ा में प्राचीन शिलालेखों और दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है, जिसने बस्तर के गौरवशाली अतीत की नई परतें खोल दी हैं।

11वीं से 13वीं शताब्दी के मिले दुर्लभ साक्ष्य

जिले में किए गए व्यापक सर्वेक्षण के दौरान अब तक कुल 5 प्राचीन शिलालेख और 2 दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। समलूर के शिव मंदिर से 11वीं शताब्दी के तेलुगु और देवनागरी लिपि में लिखे शिलालेख मिले हैं। वहीं बारसूर के ऐतिहासिक मामा-भांजा मंदिर से 1060 से 1068 ईस्वी कालखंड का महत्वपूर्ण तेलुगु शिलालेख प्राप्त हुआ है।

दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में भी 13वीं शताब्दी के दो प्राचीन शिलालेख मिले हैं, जिनमें तेलुगु और देवनागरी दोनों लिपियों का मिश्रित प्रयोग दिखाई देता है। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि बस्तर प्राचीन काल में भाषा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

ताड़पत्र पांडुलिपि ने बढ़ाई इतिहासकारों की उत्सुकता

आंवराभाटा क्षेत्र से मिली एक दुर्लभ ताड़पत्र पांडुलिपि ने शोधकर्ताओं की रुचि और बढ़ा दी है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह पांडुलिपि 150 से 300 वर्ष पुरानी है और इसमें ओड़िया लिपि का प्रयोग किया गया है। विशेषज्ञ इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज मान रहे हैं।

प्रशासन और शिक्षकों की टीम कर रही जमीनी सर्वे

दंतेवाड़ा कलेक्टर Devesh Kumar Dhruv के निर्देशन में जिला प्रशासन, मास्टर ट्रेनर्स, शिक्षकों और अधिकारियों की विशेष टीम लगातार ऐतिहासिक स्थलों का सर्वेक्षण कर रही है। जिला नोडल अधिकारी और एसडीएम के नेतृत्व में यह अभियान गांव-गांव तक पहुंचकर पुरातात्विक धरोहरों को खोजने का कार्य कर रहा है।

मंत्री Kedar Kashyap ने जताई खुशी

वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री Kedar Kashyap ने इस उपलब्धि को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इन खोजों से आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक जड़ों को समझने और उनसे जुड़ने का अवसर मिलेगा।

डिजिटलाइजेशन और संरक्षण पर जोर

जिला प्रशासन अब इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों के वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलाइजेशन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्ञानभारतम् मिशन के जरिए सामने आई ये खोजें भविष्य में बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती हैं।

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बस्तर संवाददाता

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