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धार्मिक आस्थाएँ 15 जुलाई 2026 3 मिनट का पठन 15 घंटे पहले

शिवरीनारायण: भगवान जगन्नाथ, माता शबरी और त्रिवेणी संगम का पवित्र धाम

अपडेट किया गया: 3 घंटे पहले

शिवरीनारायण: भगवान जगन्नाथ, माता शबरी और त्रिवेणी संगम का पवित्र धाम

छत्तीसगढ़ की पवित्र धरती पर स्थित शिवरीनारायण केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का ऐसा संगम है, जिसे श्रद्धालु प्रेम से "छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी" कहते हैं। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसा यह पावन धाम सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।

क्यों कहा जाता है शिवरीनारायण को छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीनों विग्रह सबसे पहले शिवरीनारायण में विराजमान थे। बाद में इन्हें ओडिशा के पुरी धाम ले जाया गया। इसी कारण शिवरीनारायण को भगवान जगन्नाथ का प्राचीन निवास स्थान माना जाता है। आज भी श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान जगन्नाथ यहां गुप्त रूप से निवास करते हैं।

यही वजह है कि जिस प्रकार पुरी का जगन्नाथ धाम पूरे देश में पूजनीय है, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में शिवरीनारायण को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।

त्रिवेणी संगम पर बसा पवित्र धाम

रायपुर से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित शिवरीनारायण महानदी (चित्रोत्पला), शिवनाथ और जोंक नदी के संगम पर स्थित है। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अद्भुत केंद्र माना जाता है।

भगवान श्रीराम और माता शबरी से जुड़ा पौराणिक संबंध

मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण इस पवित्र स्थल पर पहुंचे थे। इसी क्षेत्र में माता शबरी ने वर्षों तक तपस्या कर भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा की थी। मतंग ऋषि की भविष्यवाणी भी इसी भूमि पर पूर्ण हुई, जब भगवान श्रीराम ने माता शबरी को दर्शन दिए।

इसी कारण शिवरीनारायण को माता शबरी की तपोभूमि और भगवान श्रीराम की चरणस्थली भी माना जाता है।

दूज डोल और माघ पूर्णिमा का भव्य मेला

शिवरीनारायण का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन दूज डोल (रथदूज) और माघ पूर्णिमा मेला है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां स्नान, दान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। तीन दिनों तक चलने वाला यह पारंपरिक मेला छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है।

राम नाम बैंक: अनोखी आध्यात्मिक धरोहर

शिवरीनारायण की एक और विशेष पहचान है यहां का राम नाम बैंक। यहां देशभर के श्रद्धालुओं द्वारा लिखे गए करोड़ों "राम-नाम" सुरक्षित रखे गए हैं। यह आध्यात्मिक संग्रह श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर माना जाता है।

हर युग में बदलता रहा नाम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र नगरी के नाम समय-समय पर बदलते रहे—

सतयुग: बैकुंठपुर

त्रेतायुग: रामपुर

द्वापर युग: विष्णुपुर

कलियुग: शिवरीनारायण (नारायणपुर)

यह परिवर्तन इस स्थल की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

धर्मनगरी के रूप में नई पहचान

अपनी समृद्ध धार्मिक परंपरा, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत के कारण शिवरीनारायण को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धर्मनगरी का दर्जा भी दिया गया है। यहां के प्राचीन मंदिर, अद्भुत शिल्पकला, पत्थरों पर की गई नक्काशी और शांत वातावरण श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करते हैं।


शिवरीनारायण केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक आत्मा का प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ की आस्था, माता शबरी की तपस्या, भगवान श्रीराम के चरण, त्रिवेणी संगम और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत इस धाम को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान प्रदान करती है। यदि आप छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानना चाहते हैं, तो शिवरीनारायण की यात्रा निश्चित रूप से आपके लिए अविस्मरणीय अनुभव होगी।

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बस्तर संवाददाता

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