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छत्तीसगढ़ समाचार 27 अगस्त 2026 2 मिनट का पठन 27 अगस्त 2026

दंतेवाड़ा में गैस सिलेंडर की 45 दिन की बाध्यता घटाकर 25 दिन करने की मांग, सांसद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

अपडेट किया गया: 27 अगस्त 2026

दंतेवाड़ा में गैस सिलेंडर की 45 दिन की बाध्यता घटाकर 25 दिन करने की मांग, सांसद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

दंतेवाड़ा। बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दंतेवाड़ा जिले के शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल अवधि 45 दिन से घटाकर 25 दिन करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर जिले की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।

दंतेवाड़ा जिले के शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल व्यवस्था को लेकर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय सरकार के सामने महत्वपूर्ण मांग रखी है। सांसद ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर 45 दिन की बाध्यता को समाप्त कर रीफिल सिलेंडर उपलब्ध कराने की अवधि 25 दिन करने का आग्रह किया है।

सांसद ने पत्र में बताया कि दंतेवाड़ा, गीदम, बचेली, किरंदुल और बारसूर सहित जिले के कई नगरीय क्षेत्रों में गैस एजेंसियों द्वारा 45 दिन से पहले दूसरा सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। वहीं प्रदेश के अन्य शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 25 दिन में दूसरा सिलेंडर मिलने की सुविधा उपलब्ध होने की बात उन्होंने कही है।

25 से 30 दिन में खत्म हो जाता है सिलेंडर

महेश कश्यप के अनुसार, शहरी परिवारों में घरेलू रसोई गैस का एक सिलेंडर सामान्यतः 25 से 30 दिन में समाप्त हो जाता है। ऐसे में 45 दिन की अनिवार्य अवधि के कारण उपभोक्ताओं को सिलेंडर खत्म होने के बाद भी कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सांसद ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण लोगों को अतिरिक्त सिलेंडर के लिए परेशानी होती है और कई बार उन्हें महंगे दाम पर सिलेंडर लेने या लकड़ी-कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी असर

सांसद ने अपने पत्र में कहा कि लकड़ी और कोयले के इस्तेमाल से घरेलू वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में घरेलू गैस की उपलब्धता को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आसान बनाया जाना जरूरी है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि दंतेवाड़ा जिले की भौगोलिक, सामाजिक और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित गैस कंपनियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को अन्य शहरी क्षेत्रों की तरह 25 दिन में दूसरा सिलेंडर उपलब्ध हो सके।

यदि यह मांग स्वीकार होती है तो दंतेवाड़ा, गीदम, बचेली, किरंदुल और बारसूर जैसे नगरीय क्षेत्रों के घरेलू गैस उपभोक्ताओं को सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।

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बस्तर संवाददाता

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